कोईलवर सीएचसी में सर्पदंश मरीजों के लिए पर्याप्त एंटीबॉडी दवाएं उपलब्ध
कोईलवर। बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की सुरक्षा को लेकर तैयारी तेज कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) समेत सरकारी अस्पतालों में सर्प विषनाशक यानी एंटी स्नेक वेनम (एंटीवेनम) उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को सर्पदंश के मामलों की पहचान और उपचार को लेकर आवश्यक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है।
बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए कोईलवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भी सर्पदंश के मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम दवाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों के उपचार के साथ-साथ उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखने की भी व्यवस्था की गई है, ताकि पूरी तरह स्वस्थ होने तक चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज किया जा सके।
सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उमेश कुमार सिंह ने बताया कि सर्पदंश के मरीजों के लिए आवश्यक दवाएं अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद उसकी स्थिति के अनुसार उपचार शुरू किया जाता है और जरूरत पड़ने पर उसे ऑब्जर्वेशन में रखकर लगातार निगरानी की जाती है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में एंटीवेनम सीरम भी उपलब्ध था, लेकिन लंबे समय तक कोई क्रिटिकल केस नहीं आने के कारण उपलब्ध दवा की अवधि समाप्त हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से एंटीवेनम सीरम की दोबारा आपूर्ति के लिए संबंधित विभाग को जानकारी दे दी गई है। विभाग से आपूर्ति होने के बाद इसे अस्पताल में उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. सिंह ने लोगों से सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार मिलने से सर्पदंश के मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। अस्पताल में मरीजों के उपचार और निगरानी की समुचित व्यवस्था की गई है।
हर साल सामने आते हैं बड़ी संख्या में सर्पदंश के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं। इनमें पुरुषों की संख्या अधिक बताई जाती है। सर्पदंश के अधिकांश मामले पैरों में होते हैं, जबकि हाथ और शरीर के अन्य हिस्से भी इसकी चपेट में आते हैं। बरसात के दौरान खेतों, झाड़ियों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में सांपों का खतरा बढ़ जाता है।
सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं
चिकित्सकों के अनुसार सांप के काटने के बाद घबराने के बजाय मरीज को शांत रखते हुए जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। मरीज को दौड़ाना या चलाना नहीं चाहिए, क्योंकि शारीरिक गतिविधि से विष के शरीर में फैलने की गति बढ़ सकती है। काटे गए स्थान पर किसी तरह की कटाई-छंटाई, चूसने या घरेलू उपचार की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अंगूठी, चूड़ी, कड़ा, घड़ी और अन्य कसाव वाले सामान को तत्काल हटा देना चाहिए, क्योंकि सूजन बढ़ सकती है।
विशेषकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में सर्पविष का असर गंभीर हो सकता है। ऐसे मामलों में इलाज में बिल्कुल देरी नहीं करनी चाहिए।
ये हो सकते हैं सर्पदंश के लक्षण
जहरीले सांप के काटने के बाद काटे गए स्थान पर तेज दर्द, सूजन, लालिमा, छाला, नीलापन, रक्तस्राव, काला पड़ना या सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा पूरे अंग में दर्द, कमजोरी, उल्टी-दस्त, अधिक पसीना आना, देखने में परेशानी, हाथ-पैर ठंडे पड़ना, सांस लेने में कठिनाई, कमजोर नाड़ी और रक्तचाप कम होना जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, सीधे अस्पताल पहुंचाएं
कोईलवर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उमेश कुमार सिंह ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में समय बर्बाद न करें। मरीज को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यकता के अनुसार एंटीवेनम सहित उचित उपचार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि कई बार सांप जहरीला नहीं होता या सांप काटे बिना ही निकल जाता है। ऐसे मामलों में लोग झाड़-फूंक कराने लगते हैं। लेकिन जहरीले सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक का कोई वैज्ञानिक उपचारात्मक लाभ नहीं है। इलाज में देरी होने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
घर और खेत में बरतें सावधानी
बरसात के दौरान सर्पदंश से बचने के लिए खेतों में जाते समय जूते या बूट पहनें। रात में घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें। घर के आसपास झाड़ियां और कूड़ा-कचरा जमा न होने दें। लकड़ी के ढेर, टूटे फर्नीचर और कबाड़ को हटाते समय विशेष सावधानी बरतें। घर में अनाज या अन्य सामान रखने के स्थान को साफ रखें और पानी निकासी वाले स्थानों पर जाली लगाकर रखें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण है। मरीज को बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचाई जा सकती है। अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यकता पड़ने पर एंटी स्नेक वेनम दिया जाता है।
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