बखोरापुर में बनेगा भव्य शिव मंदिर, भूमि पूजन के साथ जीर्णोद्धार शुरू
बड़हरा (भोजपुर)। बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में आस्था और धार्मिक विरासत का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। गांव के पश्चिम बगीचा स्थित प्राचीन मंदिर परिसर में भगवान शिव और बजरंगबली के विशाल एवं भव्य मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ रविवार को विधिवत भूमि पूजन के साथ किया गया। मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रस्तावित मंदिर का निर्माण आधुनिक तकनीक और 3D नक्शे के आधार पर कराया जाएगा।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भूमि पूजन
24 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 3:30 बजे भोजपुर के प्रख्यात विद्वान ब्राह्मणों की उपस्थिति में वैदिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन संपन्न कराया गया। इस दौरान हवन, पूजन और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव, मां पार्वती और बजरंगबली की पूजा-अर्चना कर मंदिर के भव्य निर्माण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
हवन के दौरान उठती सुगंध और गूंजते वैदिक मंत्रों के बीच ऐसा आध्यात्मिक माहौल बना कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। ग्रामीणों का कहना था कि यह सिर्फ एक मंदिर के जीर्णोद्धार की शुरुआत नहीं, बल्कि गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की पहल है।
गांव की एकजुटता बनी मिसाल
भूमि पूजन कार्यक्रम में बखोरापुर गांव के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बुजुर्गों से लेकर युवाओं, महिलाओं और बच्चों तक ने कार्यक्रम में अपनी भागीदारी निभाई। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ मंदिर परिसर में जुटे और धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। कार्यक्रम के दौरान गांव में आपसी एकता और भाईचारे की भावना भी देखने को मिली।
भूमि पूजन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। लोगों ने मंदिर निर्माण में हरसंभव सहयोग करने का संकल्प भी लिया।
3D नक्शे के आधार पर बनेगा भव्य मंदिर
मंदिर कार्यकारिणी के अनुसार प्रस्तावित मंदिर का निर्माण आर्किटेक्ट इंजीनियर निरंजन सिंह की देखरेख में तैयार किए गए 3D नक्शे के आधार पर कराया जाएगा। पुराने मंदिर परिसर को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक के अनुरूप नया स्वरूप देने की योजना है। मंदिर की संरचना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि धार्मिक महत्व के साथ-साथ उसकी भव्यता और आकर्षण भी बरकरार रहे।
ट्रस्ट का उद्देश्य है कि बखोरापुर का यह शिव मंदिर आने वाले समय में भोजपुर जिले की एक प्रमुख धार्मिक पहचान बने। जिस प्रकार जय मां काली बखोरापुर वाली मंदिर की प्रसिद्धि पूरे बिहार में है, उसी तर्ज पर इस शिव मंदिर को भी श्रद्धा और आस्था के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
नाम और प्रचार के लिए दान नहीं, गुप्त दान ही स्वीकार
मंदिर निर्माण को लेकर कार्यकारिणी ने एक अनोखा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं से किसी प्रकार के नाम या प्रचार की अपेक्षा नहीं रखी जाएगी। कार्यकारिणी के अनुसार केवल गुप्त रूप से धनराशि अथवा निर्माण सामग्री के रूप में दिया गया सहयोग ही स्वीकार किया जाएगा।
कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया, अखबार, न्यूज चैनल अथवा अन्य माध्यमों में अपना नाम प्रकाशित कराने या प्रचार पाने के उद्देश्य से दान करता है, तो ऐसे सहयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर राशि वापस कर दी जाएगी। मंदिर निर्माण में सहयोग को पूरी तरह सेवा और श्रद्धा की भावना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जल्द घोषित होगी निर्माण की तिथि
भूमि पूजन के साथ मंदिर के जीर्णोद्धार की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। अब निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। कार्यकारिणी की ओर से बताया गया कि मंदिर निर्माण की वास्तविक तिथि की घोषणा जल्द की जाएगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मंदिर परिसर को चरणबद्ध तरीके से विकसित किए जाने की योजना है।
ये लोग रहे मौजूद
भूमि पूजन कार्यक्रम में जय मां काली बखोरापुर वाली मंदिर न्यास समिति के मुख्य संरक्षक एवं अध्यक्ष तथा होटल मौर्या पटना के एक्सक्यूटिव डायरेक्टर बी.डी. सिंह, सह संरक्षक रविशंकर सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण तिवारी, प्रशासक सिद्धार्थ कुमार उर्फ दीपू जी, सचिव कंचन कुमार, पर्यवेक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह और पुजारी धर्मेंद्र राय प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य डब्लू सिंह, रविंद्र सिंह, राम लखन सिंह, अनिल सिंह, संपत सिंह, राजू सिंह, हरे कृष्णा सिंह, संजय सिंह, संतोष सिंह, अखिलेश सिंह, रवि रंजन सिंह, राजा सिंह, कुंवर सिंह, चिंटू सिंह, बच्चा सिंह, मुन्ना सिंह, पप्पू बाबा, सुनील बाबा, रितेश बाबा, विशंभर बाबा, विष्णु बाबा सहित दर्जनों श्रद्धालु एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम और मंदिर जीर्णोद्धार की जानकारी कार्यकारिणी सदस्य सुनील सिंह गोपाल ने दी। उन्होंने कहा कि मंदिर का उद्देश्य केवल एक भव्य धार्मिक संरचना तैयार करना नहीं, बल्कि बखोरापुर की प्राचीन धार्मिक विरासत को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था का एक मजबूत केंद्र तैयार करना है।
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