बड़हरा प्रखंड में खतरे के निशान से ऊपर पहुंची गंगा,बाढ़ का खतरा बढ़ा, ग्रामीणों में दहशत।

Sep 2, 2026 - 18:37
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बड़हरा प्रखंड में खतरे के निशान से ऊपर पहुंची गंगा,बाढ़ का खतरा बढ़ा, ग्रामीणों में दहशत।

बड़हरा। भोजपुर। प्रखंड में महुली ख्वासपुर,पीपरपांती, मौजमपुर, सलेमपुर, बबुरा,बिंदगावां सहित अन्य कई गंगा नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से वृद्धि होने से बड़हरा प्रखंड में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सोमवार को गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए निर्धारित खतरे के निशान को पार कर गया। सुबह छह बजे नदी का जलस्तर 52.89 मीटर दर्ज किया गया था। दोपहर दो बजे तक यह बढ़कर 52.98 मीटर हो गया। वहीं शाम छह बजे जलस्तर निर्धारित खतरे के निशान 53.08 मीटर से ऊपर पहुंच गया। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों के साथ-साथ आसपास के मैदानी क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है। इससे ग्रामीणों में एक बार फिर दहशत का माहौल है।गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। खेतों में पहले से जमा बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे गांवों की ओर बढ़ रहा है। कई स्थानों पर ग्रामीण रास्तों पर पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित होने लगा है। ग्रामीणों को गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। पानी बढ़ने के साथ ही लोगों को नाव के सहारे आवागमन करने की चिंता सताने लगी है। पशुपालकों के सामने भी मवेशियों के लिए चारा और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की समस्या उत्पन्न होने लगी है।

निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा पानी
गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सबसे अधिक असर नदी के आसपास बसे निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। खेत-खलिहानों में पानी फैलने से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। कई किसानों ने बड़ी मेहनत से धान, मक्का और अन्य फसलों की खेती की थी। पानी लगातार बढ़ता रहा तो फसलों के डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दिनों जलस्तर में कमी आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन दोबारा पानी बढ़ने से उनकी चिंता फिर बढ़ गई है।बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों के समक्ष पीने के पानी की समस्या भी गंभीर होने की आशंका है। चापाकलों के आसपास पानी जमा होने से दूषित पानी निकलने का खतरा बढ़ जाता है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल, ब्लीचिंग पाउडर, हैलोजन टैबलेट और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था रखने की मांग की है।

तटबंधों पर बढ़ी निगरानी
जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग ने तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर में अभी और बढ़ोतरी जारी रहने की संभावना है। उन्होंने सभी कर्मचारियों को तटबंधों पर मुस्तैद रहने का सख्त निर्देश दिया है। तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है।विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को तटबंधों पर किसी भी प्रकार की कटाव या रिसाव की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद तटबंधों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो आने वाले घंटों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

राहत और बचाव की तैयारी की मांग
बाढ़ का खतरा बढ़ने के साथ ही ग्रामीण प्रशासन से राहत और बचाव की तैयारियां तेज करने की मांग कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में नावों की उपलब्धता, राहत सामग्री, पशुचारा और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की मांग उठने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के समय सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को होती है। ऐसे में प्रशासन को पहले से ही सुरक्षित स्थानों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के पानी के कारण संपर्क मार्गों पर आवागमन बाधित होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी होती है। कई गांवों के लोगों को बाजार, स्कूल और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पानी बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी समस्याएं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।

लगातार बदल रही स्थिति पर प्रशासन की नजर
गंगा के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में अगले कुछ घंटों के दौरान होने वाले बदलाव को लेकर ग्रामीणों में बेचैनी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में मामूली कमी के बाद सामान्य स्थिति की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब खतरे के निशान को पार करने के बाद फिर से बाढ़ का संकट सामने आ गया है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील गांवों में अधिकारियों की नियमित निगरानी कराई जाए और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव दल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। फिलहाल गंगा का बढ़ता जलस्तर बड़हरा के तटवर्ती और निचले इलाकों के लोगों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।

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Shyamji Aryan Myself Shyam Babu, a journalist with over a decade of experience in the field of journalism. I started my journalism career in 2015 and have since worked with various newspapers and media platforms. Over the years, I have gained extensive experience in ground reporting, news writing, interviewing, field reporting and covering local, social, civic and public-interest issues. My approach to journalism is based on accuracy, fairness and responsible reporting. I believe that journalism is not only about reporting news but also about bringing people's issues to the forefront and giving a voice to the community. With years of field experience, I continue to work with dedication to provide credible, factual and meaningful news to readers and viewers.