फोरलेन और सड़कों पर मवेशियों का कब्जा, हादसे का बढ़ रहा खतरा!
कोईलवर। कोईलवर और आसपास के इलाकों में सड़क व फोरलेन पर खुले में घूम रहे मवेशी वाहन चालकों और राहगीरों के लिए लगातार परेशानी का कारण बने हुए हैं। कोईलवर, सकड्डी, गीधा, कायमनगर सहित आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा आम देखा जा सकता है। कई स्थानों पर पशुपालक अपने पशुओं को बिना बांधे सड़क पार कराते हैं, जिससे किसी भी समय गंभीर सड़क दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
आरा-पटना फोरलेन जैसे व्यस्त मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक मवेशियों के आ जाने से वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। खासकर बाइक और छोटे वाहनों के चालक अचानक सामने आए पशुओं को बचाने के प्रयास में संतुलन खो सकते हैं। इससे न केवल पशु बल्कि वाहन चालक और उसमें सवार यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह के समय दूध निकालने या पशुओं को चराने के लिए ले जाने के दौरान कई पशुपालक मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं। वहीं शाम के समय पशुओं को वापस घर ले जाने के दौरान भी सड़क पार कराने का सिलसिला देखने को मिलता है। कई बार मवेशी सड़क के बीचोंबीच या सड़क किनारे घंटों खड़े रहते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है।
यह समस्या केवल फोरलेन तक सीमित नहीं है। क्षेत्र की कई लिंक रोड और ग्रामीण सड़कों पर भी मवेशियों के खुले विचरण से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है, क्योंकि कम रोशनी में सड़क पर बैठे या खड़े मवेशी वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से इस समस्या पर ध्यान देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पशुपालकों को जागरूक करने के साथ-साथ सड़क पर मवेशियों को खुला छोड़ने पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रमुख मार्गों पर चेतावनी बोर्ड लगाने और जरूरत वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने से भी दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है।
लोगों का कहना है कि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी। पशुपालकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने मवेशियों को नियंत्रित रखें और व्यस्त सड़कों पर उन्हें बिना निगरानी के न छोड़ें।
कोईलवर बीजेपी नगर अध्यक्ष संजीत रजक ने बताया कि "मैं खुद भुक्त भोगी हूँ। दूध निकालकर पशुओं को खुला छिड़ दिया जाता है। जिससे मवेशी रात में यत्र तत्र घूमते रहते हैं। कभी कभार सड़क पर ही बैठी रहती है जिससे आने जाने वाले लोगों को परेशानी होती है। कुछ मवेशी मारने वाली होती है बच्चे-महिलाओं के लिए यह खतरा भी साबित होता है। मैं इसपर जल्द ही सम्बंधित विभाग को एक पत्र सौपूंगा और कार्यवाही की मांग करूँगा ताकि जनता और जानवर दोनों सही सलामत रहें।"
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